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भूतों के निवास कुलधरा

कुलधरा गाँव जहाँ आज भी है भूतों का निवाससोचिए कि आप लॉन्ग ड्राइव पर जा रहे हों, रास्ते में कुलधरा गाँव पड़ता हो तो आप क्या करेंगे? आप को पता लग जाएगा कि यह एक शापित गाँव है, जहाँ रात को कोई भी नहीं जाता या ठहरता तो वहाँ जाना सुरक्षित नहीं है। इसलिए...

कैलाश पर्वत का रहस्य

कैलाश पर्वत, कैलाश रेंज की सबसे ऊंची चोटी है। जो तिब्बत, नेपाल और भारत में फैली हुई है। इसके अलावा, यह चीन के तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र में ट्रांस-हिमालय का एक हिस्सा है। यह पवित्र पर्वत एशिया की चार सबसे लंबी नदियों सिंधु नदी, सतलुज, ब्रह्मपुत्र और करनाली नदी के उद्गम स्थल के आसपास स्थित...

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परछाईयाँ

अगर परछाईयाँ कद से और बातें औकात से बड़ी होने लगे, तो समझ लीजिये की सूरज डूबने ही वाला है…उपदेश से करनी भली - हिंदी कहानीएक गाँव में एक बूढ़ा मुखिया रहता था। काफी उम्र हो जाने के बाद वह एक उपदेशक बन...
कुलधरा गाँव जहाँ आज भी है भूतों का निवाससोचिए कि आप लॉन्ग ड्राइव पर जा रहे हों, रास्ते में कुलधरा गाँव पड़ता हो तो आप क्या करेंगे? आप को पता लग जाएगा कि यह एक शापित गाँव है, जहाँ रात को कोई भी नहीं जाता या ठहरता तो वहाँ जाना सुरक्षित नहीं है। इसलिए आप को भी वहाँ शाम के बाद जाने के लिए स्थानीय लोगों द्वारा मना कर दिया जाएगा। आइए समझते हैं इसके पीछे की कहानी कि क्यों इस गाँव को ऐसा शाप मिल गया और क्यों यहाँ पर शाम के बाद कोई भी आता नहीं है।कहाँ पर है कुलधरा गाँवकुलधरा गाँव राजस्थान के जैसलमेर शहर से 18 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम दिशा में 13 वीं शताब्दी में बसा ये गाँव एक समय पर पालीवाल ब्राह्मणों का एक समृद्ध गाँव था। यहाँ रहने वाले ये ब्राह्मण पाली से आए थे, इसलिए पालीवाल कहलाए। इस गाँव के बारे में बहुत अधिक तो वर्णन किताबों में नहीं मिलता है परंतु 1899 में लिखी गयी इतिहास की एक किताब ज़रूर है तवारीख-ए-जैसलमेर, जिसके लेखक लक्ष्मी चंद ने इस गाँव का ज़िक्र किया है। इस किताब के अनुसार काधन नाम का एक पालीवाल ब्राह्मण इस गाँव में आने वाला पहला व्यक्ति था और उसने वहाँ पर एक तालाब की खुदाई करवायी थी। इस तालाब को लोगों ने उधनसर नाम से बुलाना शुरू किया था।क्यों आज भी शापित है कुलधरा गाँवयह गाँव शापित क्यों हुआ इसका लिखित वर्णन किसी भी किताब में तो नहीं मिलता है और एक पुरानी कहावत है कि इतिहास में नाम और तारीखों के अलावा...
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